"जब घोड़ी पर चढ़ने या मूंछ रखने जैसी साधारण बातों के लिए लोगों की पिटाई होती है, तो SC/ST एक्ट पर 'दुरुपयोग' की बहस का सच क्या है?"
SC/ST एक्ट: दुरुपयोग पर बहस Vs अत्याचार की चीख
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SC/ST एक्ट का दुरुपयोग पर बहस |
क्या है SC/ST एक्ट?: एक नजर
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम - 1989, जिसे संक्षिप्त में SC/ST एक्ट कहते हैं, भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए बनाया गया एक कानून है।
यह अधिनियम 1989 में पारित किया गया था और इसका उद्देश्य:
- अत्याचारों को रोकना: इन समुदायों को भेदभाव और उत्पीड़न से बचाना है और उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना है।
- न्याय सुनिश्चित करना: त्वरित न्याय के लिए विशेष अदालतों की स्थापना करना।
- पीड़ितों को राहत: पीड़ितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करना।
- भेदभाव को समाप्त करना: जाति-आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को समाप्त करना।
यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 17 पर आधारित है, जो समानता और अस्पृश्यता के उन्मूलन से संबंधित है।
अत्याचार की चीख और कानून की भूमिका
हमारे समाज में अक्सर ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं जो मानवता को तार-तार कर देती हैं, जैसे - किसी अनुसूचित जाति युवक को सिर्फ घोड़ी पर चढ़ने के लिए पीटा जाना, मूंछ रखने पर उत्पीड़ित किया जाना, किसी आदिवासी पर सरेआम पेशाब करना, या पानी पी लेने के 'अपराध' में एक मासूम बच्चे की पिटाई करके हत्या कर देना। ये कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं, बल्कि गहरी जड़ जमाए जातिगत घृणा और हिंसा के चरम उदाहरण हैं। ऐसे अमानवीय अत्याचारों से पीड़ित समुदायों को न्याय दिलाने के लिए ही यह अधिनियम बनाया गया है।
दुरुपयोग और बहस का सच
कुछ लोग इस अधिनियम के खिलाफ यह तर्क देते हैं कि "इसका दुरुपयोग होता है, इसलिए इसे समाप्त कर देना चाहिए।"
यहां एक गंभीर प्रश्न उठता है: क्या दुरुपयोग सिर्फ SC/ST अधिनियम तक ही सीमित है? क्या अन्य कानूनों या धाराओं का दुरुपयोग नहीं होता? जवाब स्पष्ट है: नहीं। दुरुपयोग एक व्यापक समस्या है और कई अन्य कानूनी प्रावधान भी इसकी चपेट में आते हैं।
इसके ठोस उदाहरण देखें:
- भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A: यह दहेज उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा देने वाली महत्वपूर्ण धारा है। हालांकि, अक्सर झूठे आरोपों में पति और उसके परिवार को परेशान करने के लिए इसका दुरुपयोग देखा जाता है। कई मामलों में आरोपी बाद में निर्दोष साबित होते हैं।
- डायन प्रथा (जादू-टोना) संबंधी कानून: कई राज्यों में महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित करने के खिलाफ कानून हैं। परंतु ये भी व्यक्तिगत द्वेष या संपत्ति हड़पने के लिए झूठे आरोप लगाने में इस्तेमाल होते हैं।
- छिनैती/डकैती (IPC धारा 390/391-402) और हत्या (IPC धारा 302) जैसे गंभीर आरोप: अक्सर प्रतिद्वंद्विता या बदले की भावना से निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने के लिए इन गंभीर धाराओं का भी दुरुपयोग होता है। कोर्ट में सबूतों के अभाव में आरोपी बरी हो जाते हैं।
- महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना (Outraging modesty of a woman - IPC धारा 354): महिलाओं की मर्यादा भंग करने के खिलाफ यह महत्वपूर्ण धारा है, लेकिन कभी-कभी व्यक्तिगत विवादों में भी इसका गलत इस्तेमाल होने की शिकायतें सामने आती हैं।
- घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराएँ: हालांकि यह अधिनियम महिलाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है, पर इसके तहत भी झूठी शिकायतें दर्ज कराने के मामले सुनवाई में आते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य: SC/ST अधिनियम के अलावा, IPC की धारा 323 (मारपीट), 406 (अमानत में खयानत), 420 (ठगी), 506 (आपराधिक धमकी) और अन्य कई प्रावधानों के तहत भी आरोपी अदालत से निर्दोष साबित होकर बरी होते हैं। यह साफ संकेत है कि इन धाराओं के तहत भी झूठे मुकदमे दर्ज करके दुरुपयोग हुआ था और निर्दोष लोगों को फंसाया गया था।
क्या इसका मतलब यह है कि ये सभी कानून, धाराएँ या अधिनियम गलत हैं? क्या इन्हें समाप्त कर देना चाहिए? बिल्कुल नहीं। समस्या कानूनों में नहीं है। समस्या है कुछ लोगों द्वारा इन कानूनों के दुरुपयोग में। SC/ST अधिनियम जैसे कानून वंचित समूहों को ऊपर बताए गए अमानवीय अत्याचारों और व्यवस्थित भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करने के लिए जरूरी हैं, ठीक वैसे ही जैसे दहेज, महिला उत्पीड़न या गंभीर अपराधों के खिलाफ बने कानून।
असली समाधान क्या है?
- दुरुपयोग पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, हमें उस जहरीली मानसिकता पर हमला करना चाहिए जो इन अत्याचारों को जन्म देती है।
- अगर समाज के सभी वर्गों में मानवीय गरिमा और समानता का सम्मान हो, अगर किसी के साथ उसकी जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव या अत्याचार बंद हो जाए, तो SC/ST अधिनियम जैसे कानूनों की आवश्यकता स्वतः कम हो जाएगी।
निष्कर्ष
SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 भारत के हाशिए पर पड़े समुदायों को जातिगत हिंसा और व्यवस्थित भेदभाव से सुरक्षा देने की एक अनिवार्य कानूनी ढाल है। हालाँकि इसके दुरुपयोग की आलोचनाएँ होती हैं, परंतु यह तर्क असंगत है क्योंकि दुरुपयोग किसी भी कानून (जैसे IPC की धारा 498A या घरेलू हिंसा कानून) की सीमा नहीं है। असली समस्या कानून में नहीं, बल्कि उस ज़हरीली सामाजिक मानसिकता में है जो अत्याचारों को जन्म देती है। अधिनियम को समाप्त करना नहीं, बल्कि दुरुपयोग रोकने के लिए पारदर्शी जाँच तंत्र विकसित करना, दोषियों को कड़ी सज़ा देना और सबसे बढ़कर, मानवीय गरिमा व समानता के मूल्यों को समाज में स्थापित करना ही स्थायी समाधान है। जब तक जातिगत अमानवीयता मौजूद है, तब तक यह अधिनियम पीड़ितों के लिए न्याय का एक अपरिहार्य साधन बना रहेगा।
— लेखक: सतीश कुमार शर्मा, 31 मई, 2025
नोट: IPC (Indian Penal Code - भारतीय दंड संहिता) 1860 के स्थान पर 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 कर दिया गया है और इसमें धारा की संख्या अलग हो सकता है। लेकिन पुराने मामला IPC के नाम से ही आया है।
भारतीय दंड संहिता 1860 की संगत भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा:
IPC | BNS |
---|---|
498A | 85 |
390 | 310(1)/(2)/(3) |
391 | 310(1) |
402 | 310(5) |
302 | 103(1) |
354 | 74 |
323 | 115(2) |
406 | 316(2) |
506 | 351(2)&(3) |
420 | 318(4) |
संदर्भ:
- नज़रिया: दलितों के घोड़ी पर चढ़ने से सवर्णों को कष्ट क्यों है? [https://www.bbc.com/hindi/india-43290297]
- राजस्थान: दलित दूल्हे की घोड़ी पर चढ़ने पर कर दी पिटाई, बारातियों पर धारदार हथियारों से हमला [https://ndtv.in/india/udaipur-dalit-groom-assaulted-for-daring-to-ride-mare-1687362]
- दलित दूल्हे की घोड़ी चढ़ाई पर विवाद:सांचौर में दबंगों ने छीनी घोड़ी, एसपी-एडीएम की मौजूदगी में पूरी हुई शादी [https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jalore/sanchore/news/controversy-over-dalit-groom-riding-a-mare-134501792.html]
- मूंछ रखने पर दलित को पीटा [https://navbharattimes.indiatimes.com/dalit-beaten-on-keeping-a-mustache/articleshow/65232103.cms]
- सोशल: गुजरात में मूंछों वाली सेल्फी क्यों शेयर कर रहे दलित? [https://www.bbc.com/hindi/social-41497753]
- सोनभद्र में आदिवासी युवक के ऊपर पेशाब, सपा ने पूछा- क्या यही है रामराज्य का अमृतकाल [https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/sonbhadra-urine-on-face-of-tribal-youth-in-sonbhadra-samajwadi-party-questions-yogi-government-ram-rajya-8739551.html]
- मध्य प्रदेश में आदिवासी पर किया पेशाब [https://www.dw.com/hi/mp-man-urinates-on-tribals-face/a-66121484]
- प्रवेश शुक्ला कौन हैं? मध्य प्रदेश में आदिवासी युवक पर पेशाब करने का मामला [https://www.bbc.com/hindi/articles/c97n738p05jo]
- राजस्थान: दलित छात्र ने घड़े से पिया पानी तो वहशी बन गया टीचर, ताबड़तोड़ पिटाई से फट गई कान की नस, मौत [https://www.aajtak.in/rajasthan/story/jalore-minor-dalit-student-dies-after-being-beaten-by-teacher-for-drinking-water-from-a-pot-ntc-1518038-2022-08-13]
- स्कूल में 4 साल के बच्चे की पिटाई से मौत, मां बोलीं- शिक्षिकाओं ने पीटा… तड़पता रहा पीने को पानी तक नहीं दिया [https://www.patrika.com/prayagraj/4-year-old-child-died-due-to-beating-in-school-teachers-beat-him-he-was-in-pain-and-was-not-even-given-water-to-drink-19604202]
- राजस्थानः शिक्षक की पिटाई के 23 दिन बाद दलित बच्चे की मौत, क्या है पूरा मामला [https://www.bbc.com/hindi/india-62542174]
- "शिक्षक ने मटके से पानी पीने पर पीटा था..." : NDTV से बोले मृत छात्र के परिजन [https://ndtv.in/crime-news/teacher-was-beaten-for-drinking-water-from-a-pot-relatives-of-dead-student-told-ndtv-3264180]
- IPC की धारा 498A का गलत इस्तेमाल: सबूत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 साल पुराने दहेज उत्पीड़न केस में पति को बरी किया [https://hindi.livelaw.in/category/news-updates/s498a-ipc-supreme-court-acquits-husband-in-26-yrs-old-cruelty-and-dowry-case-citing-lack-of-credible-evidence-292235]
- पति बनाता है अप्राकृतिक संबंध...झूठे आरोप से असली पीड़ित के प्रति संदेह, 498A के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट ने क्या कही वो बात [https://navbharattimes.indiatimes.com/india/delhi-high-court-false-allegations-section-498a-flaws-husband-unnatural-relations-know-supreme-court-guidelines/articleshow/121430455.cms]
- डायन बिसाही व मारपीट मामले के आरोप से पांच बरी [https://www.livehindustan.com/jharkhand/ranchi/story-five-acquitted-of-charges-of-witchcraft-and-assault-case-8327293.html]
- 18 साल बाद बरी हुआ मर्डर का दोषी, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने माना- नहीं था हत्या का इरादा [https://www.naidunia.com/chhattisgarh/bilaspur-murder-convict-acquitted-after-18-years-high-court-says-there-was-no-intention-to-kill-bilaspur-chhattisgarh-8394062]
- गुजरात कोर्ट ने हत्या के आरोपी मूक-बधिर को किया बरी, ट्रायल में मदद के लिए एक्सपर्ट से सहायता ली [https://hindi.livelaw.in/category/top-stories/gujarat-court-acquits-hearing-speech-impaired-murder-accused-engages-experts-to-aid-in-trial-296161]
- चोरी मामले में 6 महिलाएं अदालत से बरी [https://www.amarujala.com/shimla/6-women-acquitted-by-court-in-theft-case-shimla-news-c-19-sml1001-559255-2025-06-28]